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| Pujya Mahamana |
पूज्य महामना जी कहते थें- जिस समय दस हजार विद्यार्थी गंगा तट पर बैठकर संध्या वंदन करेंगे, उस समय कैसी शोभा होगी! विश्वविद्यालय में दस हजार छात्रों के लिए शिक्षा का प्रबंध हो जाए, तब अहक बुताए। .... मैं उस दिन कि बात कर रहा हूं जब चुनार तक गंगा के दोनों और विश्वविद्यालय की संस्थाएं बन जाएंगी और सभी ओर से सूर्योदय पर वेदोच्चार सुनने को मिलेगा। विश्वविद्यालय में इतनी जगह है कि इसमें त्यागी विद्वान अलग-अलग आश्रम बनाकर रहें और अपने अपने ज्ञान का उपदेश करें, तो कितना अच्छा हो। कहीं वशिष्ठ, कहीं अत्रि, कहीं गौतम, कहीं अंगिरा, हों तब विश्वविद्यालय का उद्देश्य सफल हो।
किंतु आजकल विश्वविद्यालय में किसी और ही चीज का प्रचार-प्रसार हो रहा है। और विश्वविद्यालय प्रशासन कहती है कि महामना के संकल्पों, विचारों और उद्देश्यों के अनुसार ही विश्वविद्यालय एवं यहां के छात्रों का विकास हो रहा है। विश्वविद्यालय में हो रही इन अव्यवस्थाओं के कारण ही इसकी छवि धूमिल होती नजर आ रही है। विश्वविद्यालय को महामना के सपनों के अनुसार बनाए रखने में जितना विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है उतना ही यहां के छात्रों की भी है।
महामना जी कहते हैं - भारतवर्ष संसार में सर्वश्रेष्ठ है और भारतवर्ष में काशी नगरी और काशी नगरी में हिंदू विश्वविद्यालय सर्वश्रेष्ठ है। यह संसार की राजधानी है। संसार को धर्म ज्योति देने वाली नगरी है। आधुनिक युग का प्रधान भारतीय गुरुकुल है। विश्वनाथ जी से प्रार्थना है कि इस नवीन गुरुकुल में प्राचीन आदर्श की स्थापना कर दें। मैं विश्वविद्यालय के साथ हिंदू शब्द जुड़ा रखने का इसलिए पक्षधर हूं कि हिंदुत्व में जो भी श्रेष्ठ सिद्धांत और आदर्श हैं उनका यहां से प्रचार प्रसार होता रहे।
(पुस्तक- महामना: चिंतन एवं संदेश, डॉ० उमेश दत्त तिवारी)

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